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सिरोबगड़ बाईपास का काम जल्द होगा शुरू,करीब 2 साल और लगने की संभावना

 सिरोबगड़ बाईपास का काम जल्द होगा शुरू,करीब 2 साल और लगने की संभावना




बदरीनाथ-केदारनाथ राष्ट्रीय राजमार्ग पर रुद्रप्रयाग के पास सिरोबगड़ स्लाइड जोन, जो पिछले कई दशकों से स्थानीय लोगों और चारधाम यात्रियों के लिए मुसीबत का सबब बना हुआ है, से निजात दिलाने के लिए पपड़ासू-खांखरा बाईपास का निर्माण कार्य एक बार फिर शुरू हो गया है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना के तहत तीन पुलों का निर्माण किया जा रहा है, जो इस क्षेत्र की भूस्खलन की समस्या को स्थायी रूप से हल करने में मददगार साबित होगा।

प्रदेश के लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) के सचिव पंकज पांडे ने बताया कि तकनीकी दिक्कतों के कारण यह कार्य पिछले एक साल से रुका हुआ था। अब इन समस्याओं का समाधान कर लिया गया है, और निर्माण कार्य को दोबारा शुरू कर दिया गया है। उन्होंने बताया कि बाईपास के निर्माण में करीब दो साल का समय और लग सकता है, जिसके बाद इस मार्ग पर आवागमन सुचारू हो सकेगा। बाईपास के पूरा होने से सिरोबगड़ के भूस्खलन प्रभावित क्षेत्र से गुजरने की जरूरत नहीं पड़ेगी, जिससे यात्रियों और स्थानीय लोगों को बड़ी राहत मिलेगी।

सिरोबगड़: दशकों पुरानी समस्या

सिरोबगड़ स्लाइड जोन बदरीनाथ-केदारनाथ हाईवे पर रुद्रप्रयाग और चमोली जिलों के बीच एक कुख्यात भूस्खलन क्षेत्र है। यहाँ बिना बारिश के भी पहाड़ी से बोल्डर और मलबा गिरने की घटनाएं आम हैं, जबकि मानसून के दौरान स्थिति और भी गंभीर हो जाती है। भारी बारिश के कारण यह मार्ग घंटों तक बंद रहता है, जिससे चारधाम यात्रा पर आने वाले तीर्थयात्रियों और स्थानीय लोगों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ता है।

हाल के महीनों में, विशेष रूप से 28 और 29 अगस्त 2025 को हुई भारी बारिश ने सिरोबगड़ में भूस्खलन को और सक्रिय कर दिया, जिससे हाईवे बार-बार बाधित हुआ। मलबे और बोल्डर के कारण 5-6 किलोमीटर की दूरी तय करने में यात्रियों को ढाई से तीन घंटे लग रहे थे। इस समस्या ने न केवल यात्रियों की यात्रा को प्रभावित किया, बल्कि रुद्रप्रयाग और चमोली के निवासियों के लिए आवश्यक वस्तुओं की आपूर्ति में भी देरी की

पपड़ासू-खांखरा बाईपास: उम्मीद की किरण

सिरोबगड़ की इस दीर्घकालिक समस्या के समाधान के लिए ऑल वेदर रोड परियोजना के तहत पपड़ासू-खांखरा बाईपास का निर्माण शुरू किया गया था। इस परियोजना के तहत तीन पुलों का निर्माण प्रस्तावित है, लेकिन अब तक केवल एक पुल ही बन पाया है, जबकि दो अन्य पुलों का कार्य आधा-अधूरा है। ग्राम प्रधान पपड़ासू, विमल चौहान ने बताया कि करोڑों रुपये खर्च होने के बावजूद यह प्रोजेक्ट पिछले सात वर्षों से अधर में लटका हुआ था, जिसके कारण स्थानीय लोग और यात्री निरंतर परेशानियों का सामना कर रहे थे।



पीडब्ल्यूडी सचिव पंकज पांडे ने आश्वासन दिया कि अब तकनीकी समस्याओं को हल कर लिया गया है, और निर्माण कार्य तेजी से पूरा करने के प्रयास किए जा रहे हैं। इस बाईपास के पूरा होने से सिरोबगड़ के खतरनाक भूस्खलन जोन को बायपास किया जा सकेगा, जिससे यात्रा सुरक्षित और सुगम होगी।

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